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प्रो. डी.डी. पन्त – एक रहबर की याद
अंतत: प्रो. डी.डी. पन्त एक बेहतर दुनिया का सपना देखते-देखते इस दुनिया से विदा हो गए। उन जैसे असाधारण जीवन, कर्म, भावनाओं और इरादों को अपनी मामूली कलम…
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नैनीताल की जोंकें कुछ कह रही हैं
नैनीताल के कुछ एक पुराने वाशिंदे आपको आज भी जंगलों में घूमने जाते हुए दिख जाएँगे। ये उनकी पुरानी आदत है। नैनीताल का रहवासी होने कारण मेरी भी…
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वनाग्नि से धधकता उत्तराखंड
अरुणाचल के बाद उत्तराखंड के जंगल भारत में सर्वाधिक कार्बन संरक्षण करते हैं। लेकिन हर साल जंगलों में लगने वाली आग से, इस संरक्षित कार्बन का एक हिस्सा…
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लारी बेकर – आम लोगों का असाधारण वास्तुविद
आज से कोई 70 वर्ष पूर्व लारी का मन जिस सोर की वादी में रम गया था, वह वास्तव में बेहद सुंदर थी! दूर-दूर तक काश्त किये खेतों…
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मंगलेश दा हैं कहीं हमारे आस-पास
मंगलेश दा के जाने पर पीड़ा ज्यादा ही गहरी और चुभन भरी महसूस हुई। पता नहीं, मैं किस रिश्ते से मंगलेश दा के बारे में सोचता हूँ? अपने…
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हिमालय से एक पत्र – इंदिरा गांधी के नाम
पर्यावरण,पारिस्थितिकी के साथ-साथ आज जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी बहस के इस दौर में सस्टेनेबल मिलेनियम डेवलपमेंट गोल को तेजी से प्राप्त करने की चर्चा विश्व पटल में जारी है।…
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कुमाऊँ में बेगार आंदोलन
बेगार का सामान्य अभिप्राय मजदूरी-रहित जबरन श्रम था। औपनिवेशिक कुमाऊँ में इसका अभिप्राय मजदूरी-रहित या अल्प मजदूरी देकर कराये गये जबरिया श्रम और जबरन सामग्री लिये जाने की…
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पलायन का दुष्चक्र
उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन की कल्पना करना ठीक नहीं है फिर भी वर्तमान पीढ़ी को पलायन से रोकने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयासों की जरूरत है जिसके…
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खिले हैं बुरांश
थ्रीश कपूर एक जाने माने फोटोग्राफर है। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के चेयरमैन पद से रिटायर होने के पश्चात भी उन्होंने रिटायरमेंट लेने से मना कर दिया और अपनी…
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भागीरथी घाटी में जल-विद्युत परियोजनायें और स्थानीय धारणा
भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जल-विद्युत परियोजनाओं का निर्माण विवादास्पद रहा है। ऐसी परियोजनाओं को लेकर अब तक जितने भी अध्ययन सामने आये हैं, उनमें से अधिकांश सामाजिक ताने-बाने…