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  • रणबीर रावल – एक वैज्ञानिक का असमय जाना

    रणबीर रावल – एक वैज्ञानिक का असमय जाना

    रणबीर बहुत सम्वेदनशील था। नैनीताल के विद्यार्थी काल, पंत संस्थान के वैज्ञानिक और फिर निदेशक के रूप में वह हर बार नये सवालों से रूबरू होता था। मुझे…


  • तिलाड़ी काण्ड – उत्तराखण्ड का जालियाँवाला बाग

    तिलाड़ी काण्ड – उत्तराखण्ड का जालियाँवाला बाग

    तिलाड़ी काण्ड की पृष्ठभूमि वनों के सीमांकन के साथ ही बन चुकी थी जब स्थानीय ग्रामीणों को उन्हे उन्हीं के जंगलों की सीमा पर बाँध दिया गया। टिहरी…


  • शेरपाओं का सागरमाथा

    शेरपाओं का सागरमाथा

    शेरपा, जिन्हें कि बरफीले क्षेत्रों का बाग कहा जाता है और 1920 से अब तक के ऐवरेस्ट अभियानों में जिनके 23 पुरूष दिवंगत हो चुके हैं, यहाँ के…


  • सागरमाथा और एडमंड हिलेरी
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    सागरमाथा और एडमंड हिलेरी

    चोमोलंगमा या सागरमाथा पर चढ़ने वाले वाले शेरपा तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलेरी ने शिखर पर पहुँचने  के बाद ही एहसास किया कि इतना आकर्षक पर्वत शिखर बहुत…


  • सामी आदिवासी

    सामी आदिवासी

    यह लेख 2016 में ‘सामी आदिवासी’ नाम से प्रकाशित पुस्तिका के अंशों को जोड़ कर बनाया गया है। पहाड़ पोथी के इस प्रकाशन के लेखक श्री सईद शेख़…


  • चिपको आंदोलन पर एक जरूरी किताब

    चिपको आंदोलन पर एक जरूरी किताब

    चिपको मूलतः पहाड़ी किसानों का आन्दोलन था। वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली और भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला से प्रकाशित पुस्तक ‘हरी भरी उम्मीद’ उसी समाज को समर्पित है…


  • उत्तराखंड में रामलीला की परंपरा

    उत्तराखंड में रामलीला की परंपरा

    उत्तराखंड में रामलीला मंचन में समसामयिक विषयों एवं घटनाक्रमों को भी शामिल करना इसकी प्रयोगधर्मिता का उदाहरण है। 1947 ई0 में स्वतंत्रता प्राप्ति के उल्लास एवं उत्साह की…


  • ग्यारह नंबर की गाड़ी 

    ग्यारह नंबर की गाड़ी 

    जब उत्तरकाषी के पुरोला में पहली ज्वाइनिंग के लिए गया तो चार पहिया बरसात में बडकोट ही थम गयी बस फिर ग्यारह नम्बर की गाड़ी से ही बड़कोट…


  • पूर्वोत्तर और नागा समस्या

    पूर्वोत्तर और नागा समस्या

    भारत की आजादी के समय तक नागा जीवन उनके समाज के नियमों द्वारा संचालित होता था। वे उन्हीं को आधार बना उसे चलाना चाहते थे। आज भी नागा…


  • सविनय अवज्ञा, पेशावर कांड और गढ़वाल राइफल्स: सामूहिक चेतना की समद्ध विरासत

    सविनय अवज्ञा, पेशावर कांड और गढ़वाल राइफल्स: सामूहिक चेतना की समद्ध विरासत

    भारत की आजादी के संघर्ष में 90 साल पहले 1930 के अप्रैल माह की 23 तारीख को पेशावर के किस्साखानी बाज़ार में हुई एक घटना भारतीय जन की…