-

तिब्बत के गर-गुन्शा का चीनी फौजी कैम्प
काफी समय से मेरी तिब्बत जाने की योजना थी। गढ़वाल के सरहदी गावों के व्यापारी हर वर्ष तिब्बत जाते थे। वे जुलाई में वहाँ जा अक्टूबर तक व्यापार…
-

ओड़-बारुड़ि जैसा वो कवि
नैनीताल मेरी नज़रों में आभिजात्य लोगों का ही शहर तो था। डीएसबी में एडमिशन लेने के बाद ऐसे गाढ़े अँग्रेज़ी माहौल में मुझे ठेठ पहाड़ी जुमले ‘भभरि जाने’…
-

जिन्दगी से भरे जीवन सिंह मेहता
डॉ. जीवन सिंह मेहता वास्तव में वन और वनस्पति विज्ञान के गहरे अध्येता थे। जंगलात विभाग की नौकरी ने उन्हें वन-वनस्पति का प्रत्यक्ष अनुभव भी दिया। इसलिये वे…
-

सुन्दरलाल बहुगुणा | एक जटिल युग का अन्त
उत्तराखण्ड की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान सबसे ज्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक आन्दोलनों से ही बनी। इसमें सुन्दरलाल बहुगुणा की महत्वपूर्ण भूमिका सदा याद की जायेगी।
-

लाल बहादुर वर्मा : एक बहुमंजिली प्रतिभा
कितना कुछ वे अभी भी कर रहे थे। दरअसल जब वे कहते थे कि आजकल कुछ नहीं कर रहे हैं तो भी वे कुछ न कुछ कर रहे…
-

डॉ. जीवन सिंह मेहता को हम सबका अन्तिम सलाम
एक सम्वेदनशील नागरिक, समर्पित वनविद, चिरयात्री, प्रयोगकर्ता, खिलाड़ी, स्पष्टवादी; पहाड़, चिया, वन अधिकारी संस्था आदि के आधार; उत्तराखण्ड तथा हिमालय सम्बन्धी अधिकांश विषयों पर अपनी आधिकारिक टिप्पणी और…
-

कालापानी और लीपूलेख: एक पड़ताल
भारतीय तथा नेपाली राजनय, राजनीति, मीडिया और नागरिक समाज को समझदारी और परस्पर सम्मान के साथ इन विवादों को समझना व सुलझाना होगा। संकुचित राष्ट्रवाद न नेपाल को…
-

अलविदा त्रेपन सिंह चौहान!
त्रेपन की छवि मेरे मन-मस्तिष्क में ‘विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार हावर्ड फास्ट के नायक ‘स्पार्टाकस’ की तरह है जो कि सामाजिक-राजनैतिक सत्ता के अन्याय के विरुद्ध हमेशा आन्दोलित रहता…
-

लॉकडाउन में उत्तराखंड
इस चित्रात्मक लेख में हम ‘पहाड़’ के मित्रों द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न भागों से भेजे गए चित्रों को प्रस्तुत कर रहे हैं। ये चित्र केवल आज की हकीकत…
-

Uttarakhand in Lockdown
In this pictorial article, we are presenting photographs sent by friends of “PAHAR” from different parts of Uttarakhand. These images are not just a reflection of today’s reality,…