इतने फूल खिले

चंद्र कुंवर बर्त्वाल की चुनिंदा कवितायें

Cover Page of Itney Phool Khiley

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चंद्र कुंवर बर्त्वाल को ‘प्रकृति का सुकुमार कवि’ कहा जाता है। 28 वर्ष की छोटी सी उम्र में राजयक्ष्मा (टी.वी.) के कारण उनका निधन हो गया लेकिन इस अल्प काल में भी उनकी लेखनी प्रकृति के अनेक रंगो को कविताओं के माध्यम से पृष्ठों में उतारती रही। उनकी पहली कविता मात्र 20 वर्ष की आयु में कर्मभूमि में छ्पी थी। इसके बाद वह मृत्यु पर्यंत लगातार लिखते रहे। हाँलाकि उनकी कई कवितायें उनकी मृत्यु के बाद ही छ्पीं। उनकी कविताओं को उनके कई मित्रों, प्रसंशको, समीक्षकों ने सहेज कर रखा।

इस पुस्तक में श्री उमाशंकर सतीश द्वारा चयनित कवितायें है। इस संग्रह का लिप्यांकन श्री अशोक पांडे ने किया है और इसकी भूमिका श्री गोविंद चातक ने लिखी है।

चंद्र कुंवर बर्त्वाल की चुनिंदा कविताओं से सजी हुई है यह पुस्तक।


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